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30 की उम्र पार करने के बाद हर महिला को यह पांच टेस्ट ज़रूर करवाने चाहिए।

आजकल भाग दौड़ भरी ज़िंदगी के कारण कोई भी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य पर ठीक प्रकार से ध्यान नहीं दे पाता विशेषकर महिलाएं। महिलाएं मल्टीटास्किंग होती हैं उन्हें घर के अलावा बहुत से बाहर के काम भी करने पड़ते हैं। इसी सब के चलते वह अपनी हेल्थ को बिल्कुल ही भूल जाती है। जिसके कारण बाद में उसे बहुत से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए अपने स्वास्थ्य को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि जान है तो जहान है। ऐसी महिलाएं जो 30 साल की हो चुकी है या फिर होने वाली है उन्हें अपनी हेल्थ का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाकर चेकअप कराने से सेहत का ख़्याल रखा जा सकता है और इसके अलावा किसी आने वाली अनजानी बीमारी का पहले से ही पता लगाया जा सकता है।

आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे ऐसे कौन से पांच मेडिकल टेस्ट है जो हर उस महिला को कराने चाहिए जिसकी उम्र 30 साल हो चुकी है।

Contents

1. थायराइड टेस्ट

थायराइड की समस्या आमतौर पर पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होती है। इसलिए महिलाओं को इस बीमारी को लेकर थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। 30 की उम्र के बाद थायराइड टेस्ट कराना अत्यंत आवश्यक हो जाता है ताकि पता लगाया जा सके कि यह बीमारी आपको हुई तो नहीं है। महिलाओं के शरीर में 30 के बाद हार्मोनल चेंज होने लगते हैं जिसके कारण भी यह समस्या हो जाती है। इसलिए हर 5 साल में एक बार थायराइड टेस्ट कराना ज़रूरी है।

थायराइड के मुख्य लक्षण:

2. कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच

30 साल की उम्र होने के बाद हर महिला को कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच ज़रूर करानी चाहिए क्योंकि इस उम्र में आकर हाई बीपी जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। यदि समय पर इनका पता न चले तो इसके कारण दिल और दिमाग़ से जुड़ी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं और कभी-कभी तो यह बहुत घातक सिद्ध होती हैं। इसलिए हार्ट और ब्रेन जैसी बीमारियों से बचने के लिए अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच साल में एक बार अवश्य करानी चाहिए। यदि आपका बीपी हाई रहता है तो उचित दवा और सही खान-पान की आदतें अपनाने से आप इस पर बहुत आसानी से कंट्रोल कर सकती हैं।

हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण:

3. स्तन कैंसर टेस्ट

उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या की संभावना अधिक हो जाती है। यह एक ख़तरनाक बीमारी है जिसका समय रहते पता लगना बहुत आवश्यक होता है। इसकी पहचान करने के लिए मैमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर की शुरूआत एक छोटी सी गांठ से होती है और धीरे-धीरे यह फैलने लगती है। यदि आप की उम्र 30 पार कर चुकी है तो यह टेस्ट आपको हर साल एक बार अवश्य कराना चाहिए। इसके अलावा आप खुद भी इस बात का पता लगा सकती हैं कि आपको ब्रेस्ट कैंसर हुआ है या नहीं। सेल्फ परीक्षण के द्वारा इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। यदि आप स्वयं जागरूक हैं तो आप इस बीमारी की पहचान आसानी से कर सकती हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण:

4. डायबिटीज की जांच

भारत में डायबिटीज के मरीज़ बहुत ज़्यादा है जिसके कारण यहां पर रहने वाले लोगों में इसके होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए महिलाओं को उसका टेस्ट अवश्य कराना चाहिए। डायबिटीज के बारे में कहा जाता है कि यदि यह बीमारी किसी इंसान को एक बार हो जाए तो उसका जिंदगी भर पीछा नहीं छोड़ती तथा बहुत से लोग इसे धीमी मौत भी कहते हैं। इसके कारण शरीर में दूसरी बीमारियां भी पनपने लगती हैं जैसे किडनी, लिवर, हार्ट इत्यादि से संबंधित बीमारियां। इसके कारण आंखों पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है यदि आप इसका इलाज नहीं कराएगी तो आप हमेशा के लिए अंधी भी हो सकती है। इसलिए आप समय रहते इसका चेकअप करा कर पता लगाएं कि कहीं इस बीमारी ने आपको जकड़ तो नहीं लिया है। यदि आपको डायबिटीज हो जाए तो आप डॉक्टर से उचित परामर्श करें और अपना खान-पान सुधारें।

डायबिटीज के लक्षण:

5. पैम स्मियर / फर्टिलिटी एंड प्री-प्रेगनेंसी इवैल्यूएशन

पैम स्मियर टेस्ट उन सभी महिलाओं को कराना चाहिए जिनकी उम्र 30 साल की हो चुकी है या फिर 30 साल से अधिक की है। इसके द्वारा यूट्रस के कैंसर का पता लगाया जाता है। बहुत सी गायनी एक्सपर्ट का मानना है कि इस टेस्ट को 1 से 3 साल में रिपीट करवाते रहना चाहिए। लेकिन यदि सेल्स में किसी प्रकार के बदलाव दिखें तो फिर इस टेस्ट को जल्दी-जल्दी करवाने की सलाह दी जाती है। यदि आप सचेत नहीं रहेंगी तो फिर इस बीमारी का आपको जल्दी पता भी नहीं चलेगा क्योंकि ऐसी बीमारियों का अकसर बहुत देर में पता चलता है।
फर्टिलिटी एंड प्री-प्रेगनेंसी इवैल्यूएशन- 30 की उम्र के बाद महिला की कंसीव करने की क्षमता कम होना शुरू हो जाती है। इस टेस्ट के द्वारा आपको यह पता चलता है कि मां बनने की आप की सही उम्र कौन सी है। इसलिए यह टेस्ट करवाना आपके लिए अत्यंत आवश्यक है।

6. आंखों की रोशनी

जैसे जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ने लगती है वैसे वैसे उसकी आंखों की रोशनी पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। जब एक महिला 30 साल की उम्र पार कर लेती है तो उसकी आंखों की दृष्टि पर भी प्रभाव पड़ने लगता है। यदि आपको कभी चश्मे की जरूरत नहीं भी पड़ी और आपकी आंखें हमेशा से बहुत सही है तो भी आप अपनी आंखों का चेकअप ज़रूर कराएं। अगर आपकी आंखों में खुजली, जलन रहती है तथा आंखों से पानी भी निकलता है तो आपको फौरन ही किसी अच्छे नेत्र चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

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